तीन सालों से प्रसूतिगृह की प्रतीक्षा कर रही आदिवासी महिलाएं

समर प्रताप सिंह
ठाणे। तीन साल पहले घोड़बंदर रोड स्थित रोजा गार्डेनिया में ठाणे मनपा संचालित अस्पताल अस्तित्व में आया था। लेकिन इतनी लंबी अवधि बीत जाने के बाद भी प्रसूतिगृह को कार्यान्वित नहीं किया जा सका है।

स्थानीय स्तर पर प्रसूतिगृह की समस्या को देखते हुए पूर्व उपमहापौर व वर्तमान नगरसेवक नरेश मणेरा ने ठाणे मनपा आयुक्त डॉ. विपीन शर्मा से लिखित आग्रह किया है कि जल्द प्रसूतिगृह को कार्यान्वित किया जाए। ताकि आदिवासी गर्भवती महिलाओं को समुचित चिकित्सा सुविधा मिल सके।
विदित हो कि हाल के दशकों में घोड़बंदर परिसर $का तेजी से नागरीकरण हुआ है। परिसर में गरीब व मध्यम आयवर्ग के लोगों की भी भरमार है। जबकि यहां स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं की कमी रही है। इसी कमी को देखते हुए सबसे पहले नगरसेवक नरेश मणेरा ने गर्भवती महिलाओं के इलाज के लिए प्रसूतिगृह भी शुरू करने की मांग ठाणे मनपा प्रशासन से की थी।
इसके बाद मनपा प्रशासन ने घोड़बंदर रोड स्थित रोजा गार्डेनिया में अस्पताल शुरू किया।  इस अस्पताल में रोजाना आम नागरिकों का इलाज किया जा हा है। अस्पताल का आऊटडोर शुरू है।

इन बातों की जानकारी देते हुए नरेश मणेरा का कहना है कि उक्त अस्पताल मं किडनी डायलेसिस की भी सुविधा उपलब्ध है। लेकिन यहां तीन साल बीत जाने के बाद प्रसूतिगृह शुरू नहीं किया जा सका। जिस कारण स्थानीय स्तर पर गर्भवती गरीब महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
गर्भवती महिलाओ की समस्याओं को देखते हुए स्थानीय नगरसेवक मणेरा लगातार मनपा प्रशासन के साथ पाठपुरावा करते आ रहे हैं। लेकिन अधिकारीगण इसको गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने ठाणे मनपा आयुक्त डॉ. विपीन शर्मा को भी जानकारी उपलब्ध कराई है। उनका कहना है कि इस अस्पताल में प्रसूतिगृह के लिए आवश्यक चिकित्सा उपकरण, ऑपरेशन थिएटर आदि की उपलब्धता करा दी गई है।
मणेरा का आरोप है कि प्रसूतिगृह के लिए आवश्यक आरएमओ, डॉक्टर, नर्स व अन्य कर्मचाी उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। जिस कारण प्रसूतिगृह शुरू नहीं किया जा सका है। बताया गया है कि घोड़बंदर परिसर के प्रभाग क्रमांक-१ अंतर्गत वाघबीळ, कासार वडवली, भाईंदरपाडा, गायमुख आदि भागों में आदिवासियों के साथ ही सामान्य नागरिक झोपड़पट्टी में रहते हैं।

कोरोना काल में प्रसूतिगृह के अभाव के कारण गरीब महिलाओं को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही निजी अस्पतालों में गरीब गर्भवती महिलाओं का इलाज कराना संभव नहीं है। इसे देखते हुए मणेरा ने मांग की है कि इस प्रसूतिगृह को जल्द से जल्द कार्यान्वित कर आश्यक चिकित्सा सामग्रियों के साथ ही आरएमओ, डॉक्टर्स, नर्सेस व अन्य कर्मियों की नियुक्ति की जाए। अन्यथा स्थानीय नागरिकों का गुस्सा भडक भी सकता है।

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