शिवसेना सहकार जिलाप्रमुख प्रदीप जंगम और रमेश गिरी भाजपा में शामिल।

समर प्रताप सिंह
ठाणे। कभी ठाणे जिला पलकमंत्री एकनाथ शिंदे के बहुत करीबी रहे शिवसेना सहकार विभाग के ठाणे जिला अध्यक्ष प्रदीप जंगम ने शिवसेना के ही उत्तरभारतीय सेल के जिलाध्यक्ष रमेश गिरी के साथ पार्टी को राम-राम कर भाजपा में प्रवेश लिया। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटील की उपस्थिति में जंगम और गिरी ने भाजपा में प्रवेश लिया। भाजपा प्रवेश का यह कार्यक्रम मुंबई में आयोजित किया गया था।
विदित हो कि भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता श्वेता शालिनी के मार्गदर्शन में ही जंगम और गिरी का प्रवेश भाजपा में हुआ। इस अवसर पर भाजपा के ठाणे शहर जिलाध्यक्ष व विधायक निरंजन डावखरे के साथ ही अन्य मान्यर भी उपस्थित थे। बताया जाता है कि शिवसेना के सहकार विभाग जिला अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने संगठन को पूरे जिले में मजबूती दी थी। भाजपा प्रवेश पर अपनी प्रतिक्रियाव्यक्त करते हुए प्रदीप जंगम का कहना था कि वे शुरू से ही देश के पीएम नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व से खासे प्रभावित रहे हैं। इसके साथ ही अपने सीएम के कार्यकाल में देेवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट् की गरिमा को एक नई पहचान दी थी। वे प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत दादा पाटील के नेतृत्व में काम करने को उतावले हैं।
इसके साथ ही ठाणे जिले में अपनी अच्छी राजनीतिक व सामाजिक पकड़ रखने वाले रमेश गिरी ने भी शिवसेना उत्तरभारतीय सेल के ठाणे जिला अध्यक्ष रहते हुए संगठनात्मक तौर पर बेहतर काम किया था। उनके भाजपा प्रवेश के साथ ही स्थिति बदल गई है। अपने समाजोपयोगी कार्यों द्वारा वे पहले से ही समाज में लोकप्रिय रहे हैं। दोनों नेताओं के साथ ही सहकार विभाग के महासचि राजेश सिंह,  सचिव किरण शाह, वरिष्ठ समाजसेवी दीनानाथ पांडे के साथ ही दर्जनों शिवसैनिकों  ने भाजपा में प्रवेश लिया। जंगम और गिरी ने भाजपा प्रदेश नेतृत्व को आश्वस्त किया कि वे ठाणे शहर जिला अध्यक्ष निरंजन डावखरे के नेतृत्व में पार्टी प्रभाव के विस्तार  के लिए काम करेंगे।
दूसरी ओर प्रदीप जंगम के भाजपा प्रवेश को लेकर राजनीतिक गलियारों में विशेष चर्चा हो ही है कि गत विधानसभा चुनाव के समय से ही वे स्थानीय शिवसेना नेतृत्व से नाराज चल हे थे।

गत विधानसभा चुनाव के समय जंगम ने मुंब्रा-कलवा विधानसभा से चुनाव लडऩे की अधिकृत दावेदारी की थी। लेकिन नेतृत्व ने उनकी दावेदारी को खारिज कर दिया था। यहां जंगम के स्थानीय चेहरा होने के बाद शिवसेना ने उन्हें दरकिनार करते हुए एक बाहरी महिला को चुनाव मैदान में उतारा था। जिस कारण उनकी करारी पराजय हुई थी। अपनी उपेक्षा से जंगम नाराज चल रहे थे। आखिरकार उन्होंने भाजपा में प्रवेश लेकर जनसेवा करने का संकल्प लिया है।

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