मनपा आरोग्य अधिकारी डॉ.मुरुडकर हुए थे ऊंची साजिश के शिकार।

समर प्रताप सिंह
ठाणे। ठाणे मनपा के पूर्व आरोग्य अधिकारी डॉ. राजू मुरुडकर निश्चित तौर पर निष्ठावान अधिकारी थे। अब डॉ. मुरुडकर के रिश्वतखोरी मामले में नए खुलासे सामने आ रहे हैं। स्वयं इस मामले को लेकर डॉ. मुरुडकर ने खुलासा किया है कि उन्हें बड़े ही शातिराना अंदाज में रिश्वतखोरी मामले में फंसाया गया था।

यदि वे सेवा में नियमित रहते तो कोरोना संकट के समय निजी अस्पतालों में जो रोगियों के साथ आर्थिक लूटपाट हो रही थी, वह आगे जारी नहीं रह सकता था। जिस कारण अस्पताल माफियाओं ने उन्हें रिश्वतखोरी के झूठे जाल में फंसाकर सेवा से हटवा दिया।
विदित हो कि कोरोना संकट के समय डॉ. मुरुडकर ने ठाणेकरों की जो सेवा की थी, उसे नकारा नहीं जा सकता है। उनके सेवाकाल में किसी तरह की गड़बड़़ी निजी या सरकारी अस्पतालों में कोरोना संकट के समय नहीं हो पा रही थी। कोरोना कहर के बीच जब निजी अस्पतालों ने रोगियो को बिल के नाम पर लूटना शुरू किया था तो डॉ. मुरुडकर द्वारा उठाए गए कदमों से ही उस पर रोक लग पाई थी।
इतना ही नहीं जब कोरोना मरीजों से निजी अस्पतालों में बिल के नाम पर लूटपाट की जा रही थी तो डॉ. मुरुडकर के कारण ही ऐसे अस्पतालों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की गई थी। निजी कोरोना अस्पतालों में रोगियों से जो दो करोड़ से अधिक का मनमाना बिल लिया गया था. उसे रोगियों को डॉ. मुरुडकर के कारण ही वापस करना पड़ा था। निजी अस्पताल माफियाओं को विश्वास था कि जब तक डा राजू मुरुडकर ठाणे मनपा के वैद्यकीय अधिकारी रहेंगें तबतक मनमाना कमाई नहीं कर पाएंगे।

इन बातं की पुष्टि करते हुए डॉ. मुरुडकर ने विशेष खुलासा किया कि उन पर बड़े लोगों का दबाब भी था। लेकिन वे उस दबाब के आगे नहीं झुके। आखिरकार बड़ी सुनियोजित साजिश कर उन्हें पांच लाख रिश्वतखोरी में फंसाकर सेवा से हटवा दिया गया। जब तक डॉ. मुरुडकर ठाणे मनपा में वैद्यकीय अधिकारी के तौर पर सेवा में रहे ठाणे शहर में रेमडिसिवर दवा की घपलेबाजी नहीं हो पा रही थी। लेकिन उसे हटाए जाने के बाद निजी कोरोना अस्पतालों की चांदी हो गई।
विदित हो कि कोरोना रोगियों से अधिक बिल वसुली के मामले में डॉ. राजू मुरुडकर ने प्रशंसनीय प्रशासनिक कार्रवाई की थी। ठाणे शहर के कई निजी कोरोना अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्होंने उसका  कोरोना अस्पताल का दर्जा भी वापस ले लिया था। ऐसी स्थिति में निजी अस्पताल माफियाओं ने मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची। पांच लाख रिश्वत प्रकरण में उनहें फंसाकर मनपा सेवा से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इन तमाम स्थितियों के बाद भी डॉ. मुरुडकर ने न्यायालय पर विश्वास करते हुए कहा है कि वे इस झुठे मामले से अवश्य ही बरी होंगे।
कहा जा रहा है कि जब ठाणे शहर में कोरोना संकट आया तो डॉ. मुरुडकर के सेवाकाल में ही ग्लोबल हॉस्पिटल ,पार्किंग प्लाझा हॉस्पिटल, कळवा, मुंब्रा व भाईंदर पाडा कोरोंटाइन सेंटर बनाए गए थे। तमाम जबाबदारी उन पर ही मनपा आयुक्त ने सौंपी थी। कोरोना रोगियों को दवाएं तथा अन्य चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने में उन्होंने कीर्तिमान बनाए थे। जिसकी सराहना शहर में भी हो रही थी। मुरुडकर का मानना है कि जब उन्होंने कोरोना रोगियों से अधिक बिल वसूली मामले में कार्रवाई की तो उसी समय से उसके खिलाफ साजिश रची जाने लगी।
कई अस्पतालों को उन्होंने काली सूची में डाला।

निजी कोरोना अस्पतालों को मरीजों के दो करोड़ रूपये वापस भी करने पड़े थे। जो बिल की आड़ में लिया गया था। कहा जा रहा है कि उनकी सेवाभावी योजना से निजी अस्पताल संचालकों की कमाई पर असर पड़ रहा था। नौ महीने के सेवाकाल मं डॉ. मुरुडकर ने ठाणे शहर के २५ स्थानों पर आपला दवाखाना शुरू करवाया। जिससे निजी अस्पतालों को दर्द हो रहा था। साथ ही कोरोना काल में निजी अस्पताल मरीजों की लूटपाट भी नहीं कर पा रहे थे। डॉ. मुरुडकर से मुक्ति पाने के लिए उसके खिलाफ पांच लाख रिश्वत लेने की पृष्ठभूमि बनाकर उन्हें फंसाया गया।

इसके बाद डॉ. मुरुडकर पर दबाब बनाया गया कि वे निजी अस्पतालों के प्रति नरमी बरते। लेकिन उन्होंने उसे मान्य करने से इंकार कर दिया। उपरोक्त संदर्भ में स्वयं डॉ. मुरुडकर का कहना है कि उन्होंने जिस निष्ठा से ठाणेकरों की सेवा की, उन्हें उस पर गर्व है। अंत में जीत सच्चाई की ही होगी।

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