काटो घास,कमाओ पैसा

उदयभान पांडेय।

ठाणे। मुंबई, नवी मुंबई,ठाणे तथा पालघर आदि क्षेत्रों में सैकड़ों की संख्या में तबेले है। तबेलों में मौजूद गायों तथा भैसों को खिलाने के लिए जो गवत नामक घास दी जाती है वह इस समय हरे भरे जंगलों तथा मैदानी इलाको में बड़े पैमाने पर उपलब्ध है। घासों की कटाई करने तथा उसे बेचने में होने वाली कमाई को देखते हुए अनेक बेरोजगार युवक, किसान तथा आदिवासी परिवार इस काम मे जुटे हुए है औऱ अच्छी खासी कमाई कर रहे है।
घास ब्यवसाय, एक बडा रोजगार।
घास ब्यवसाय से हजारो लोग जुड़े हुए है। मानसून की समाप्ति के बाद उगी हुई हरी घासों को काटने तथा उसे बेचने का काम ग्रामीण भागो में किया जाता है। यह भी उनके रोजी रोटी का एक जरिया है। सुबह 6 बजे से 11 बजे तक घासों की कटाई की जाती है। इस समय 100 किलो घास का 90 रुपया भाव चल रहा है। घास काटने वाले प्रतिदिन 350 से 400 रुपये की कमाई कर रहे है। तबेले मालिको या घास ब्यवसाइयो के ट्रक दोपहर होते होते निर्धारित जगहों पहुँच जाते है। काटी हुई घासों को तौलने, घास के पैसे अदा करने तथा घासों का गट्ठर बनाने का काम जगह पर ही किया जाता है।

घास ब्यवसायी बालू जयराम विशे का कहना है कि हम लोग प्रतिदिन हजारों किलो घास (गवत) की खरीददारी करते हैं। घासों की कटाई तथा खरीददारी का काम तीन महीने तक चलता है। कोरोना काल मे गड़बड़ाई आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए ग्रामीण तथा आदिवासी भागो के हर आयु वर्ग के लोग घासों की कटाई का काम कर रहे है और करीब 400 रुपया प्रतिदिन कमा रहे है। उन्होंने बताया कि इस समय दर्जनों ब्यापारी एवं तबेला ब्यवसायी ग्रामीण भागो में घासों को खरीदने तथा स्टाक करने का काम कर रहे है। यही ब्यापारी पूरे साल आवश्यकतानुसार तबेलों में घासों की आपूर्ति करते है।

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