शिवाजी अस्पताल के प्रसूति कक्ष मे रोजाना होता ८० शिशुओं का जन्म प्रसूति विभाग को संभाल रहे हैं केवल चार डॉक्टर

समर प्रताप सिंह
कलवा। कलवा स्थित शिवाजी अस्पताल में रोजाना गर्भवती महिलाएं ८० बच्चों को जन्म दे रही है। लेकिन शिवाजी अस्पताल के प्रसूति विभाग में डॉक्टरों के साथ ही अन्य सेवाकर्मियों की कमी है। अचंभित करनेवाली बात है कि अस्पताल के प्रसूति विभाग को चार डॉक्टर ही संभाल रहे हैं। जबकि यहां आनेवाली महिलाओं के परिजनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रसव के दौरान लगनेवाली दवाई और उपकरण महिलाओं के परिजनों को बाहर से खरीद कर लाना पड़ता है।
कहने को तो यह सरकारी अस्पताल है, लेकिन इलाज के लिए दवाएं और  सामान बाहर से खरीदना पड़़ता है। विदित हो कि शिवाजी अस्पताल केवळ ठाणे श्हर ही नहीं जिले के उपनगरों के साथ ही पालघर जिले और ग्रामीण भागों से भी गर्भवती महिलाएँ प्रसूति निमित्त यहां आकर भर्ती होती है। जबकि ठाणे जिले को संभालने के लिए एक मात्र यही  अस्पताल है। भिवंडी शहर स्थित इंदिरा गांधी उपजिला अस्पताल का प्रसूति विभाग सभी सुविधा से लैस होने के बावजूद अधिकतर गर्भवती महिलाओं को प्रसूति के लिये ठाणे के कलवा शिवाजी अस्पताल और मुंबई के कामा और केईएम अस्पताल में रेफर किया जाता है।
लेकिन मुंबई दूर होने के कारण ज्यादातर मरीज कलवा अस्पताल में एडमिट होने के लिए आते हैं। बताया जाता है कि शिवाजी अस्पताल के प्रसूति कक्ष में रोजाना ७० से ८० गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी  होती है। सबसे अचरज करने वाली बात यह है कि प्रसुति गृह को चलाने के लिए मात्र चार डाक्टर और २० के करीब नर्स उपलब्ध हैं। अस्पताल में सीजर डिलीवरी की संख्या अधिक है। लेकिन  दवाओं और आपरेशन के लिए लगने वाले सामान का यहां अभाव है। जबकि ग्रामीण इलाकों से ऐसे मरीज भी आते हैं जिनके पास केस पेपर निकालने के लिए दस रुपए भी नही होते हैं। ऐसे में इन मरीजों के परिजनों को बाहर से सीजर करने के लिए ३ से चार हजार रुपए तक का सामान बाहर से खरीदना पड़ता है। आपको बता दें कि ठाणे जिले का एकमात्र कलवा स्थित शिवाजी अस्पताल है ,जिसको गरीबों का  जीवनदाता अस्पताल कहा जाता है। लेकिन रोजाना  दूर-दराज से आस लगाए आने वाले मरीजों को सही तरीके से इलाज ना मिलने का दर्द भी है।
अशोक गुप्ता नामक एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी गर्भवती बहू का नाम भिवंडी के आईजीएम अस्पताल में भर्ती के लिए दर्ज करवाया गया था। लेकिन वहां सेवारत डॉक्टरों तथा नर्स ने इतना डराया कि वे स्वयं घबरा गए। बहू को मुंबई के कामा अस्पताल या फिर कलवा के शिवाजी अस्पताल ले जाने को कहा। इसके बाद गुप्ता अपनी बहू को लेकर शिवाजी अस्पताल आए। जब वे कलवा अस्पताल पहुंचे तो वहां के नर्स और डाक्टर ने साफ तौर पर  भिवंडी से आये पेशेंट को एडमिट करने से मना कर दिया। उन्हें कहा गया गया कि वे कामा अस्पाल ले जाएं। लेकिन काफी आग्रह करने के बाद कहा गया कि यहां पर एनआईसीयू  सुविधा की कमी है.। अगर आप के बच्चे को एनआईसीयू की जरूरत पड़ती है तो उसका जवाबदार आप होंगे। यह कहते हुए एक पेपर पर सिग्नेचर करवाया गया, साथ ही यह भी बताया गया यहां पर सर्जरी डॉक्टर नही है, अगर आपके पेशेंट को कुछ होता है तो उसकी जवाबदारी हमारी नहीं होगी, इसलिए आप लिख कर दो उसके बाद डिलीवरी के लिए भर्ती किया गया।
कुछ ही समय में उन्होंने एक लिस्ट बनाकर सर्जरी में लगने वाली साढ़़े तीन हजार की  दवाइयां बाहर मेडिकल से लेकर आने को कहा गया। जबकि  शिवाजी अस्पताल ठाणे महानगरपालिका के अंतर्गत आता है. यहां एक डॉक्टर ने कहा है कि प्रसुति गृह को चलाने के लिए मात्र चार डाक्टर और २० के करीब नर्स  उपलब्ध हैं, तो हॉस्पिटल में  ऑपरेशन ,(सीजर) साहित्य का बहुत ही अभाव है। हैंड ग्लोब्स तक मरीजों को लेकर आना पड़ता है। कुछ ग्रामीण इलाकों से ऐसे मरीज भी आते है जिन्हे केश पेपर निकालने के लिए दस रुपए भी नही होते है, ऐसे में इन मरीजों को बाहर से सीजर करने के लिए ३ से चार हजार रुपए तक सीजर करने के लिए साहित्य बाहर से खरीदना पड़ता है, डॉक्टरों का कहना था कलवा हॉस्पिटल में डॉक्टर की भर्ती नहीं करेंगे और ना ही कोई सुविधा देंगे तो हमलोग कैसे मरीजों का ईलाज कर सकते हैं।१८ घंटे शिवाजी हॉस्पिटल में बिताने के बाद सत्य यह भी सामने आया कुछ डॉक्टर पर इतना अधिक लोड होता है कि उन्हें मजबूरन मरीजों से गलत व्यवहार करना पड़ता है, मगर किसी भी मरीज को बिना ईलाज किए बिना उन्हें नहीं जाने दिया जाता है, यही हाल केश पेपर बनाने वाले कर्मचारियों का भी है, एक काउंटर से प्रसुति विभाग, अपघात विभाग, एक्स रे पेपर निकालने के अलावा मरीजों को मेडिसीन भी देना पड़ता है।

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