रावण रूपी ऑन लाईन कंपनियों का दहन करेगी कैट

उदयभान पांडेय।ठाणे
गत कुछ वर्षों में ऑनलाइन कंपनियों द्वारा किए जा रहे हैं व्यापार करने के तौर-तरीकों की वजह से भारत के परंपरागत व्यापार करने वाले छोटे एवं मझोले व्यापारियों को अपने व्यापार से हाथ धोना पड़ रहा है जिससे भारत के अंदर बड़े पैमाने पर बेरोजगारी बढ़ने का अनुमान है और कैट ने तर्क दिया है कि ये ई कॉमर्स कंपनियां जीएसटी और आयकर नियमों की भी धज्जियां उड़ा रहे है.
उपभोक्ताओं को आकर्षित करने के लिए फ्लिपकार्ट ने 16 अक्टूबर से और अमेजन ने 17 अक्टूबर से बंपर फेस्टिवल सेल की घोषणा की थी . कैट ने दावा किया है कि ई-कॉमर्स कंपनियों का यह कदम भारत सरकार के एफडीआई नियमों का खुला उल्लघंन है.

लागत से कम मूल्य पर बेच रही है ये ई-कॉमर्स कंपनियां

अखिल भारतीय खाद्य व्यापार महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केट के महानगर अध्यक्ष श्री शंकर ठक्कर ने कहा ने कहा कि त्यौहारी सीजन में इन ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दी जा रही बंपर सेल के तहत सामानों को वास्तविक मूल्य से भी कम मूल्य पर बेचा जा रहा है. ये कंपनियां विभिन्न सामानों पर 10 से 80 फीसदी तक छूट दे रही है. जबकि सामानों पर जीएसटी बिक्री मूल्य पर लिया जाता है ऐसे में सरकारी खजाने पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा. अगर सामानों को वास्तविक मूल्य पर बेचा जाता है तो सरकारों को अधिक जीएसटी कलेक्शन होगा. कैट ने कहा कि इन कंपनियों में निवेश कर रहे निवेशक ही छूट दे रहे है जिसका खामियाजा सरकारों को भुगतना पड़ रहा है. पिछले कई सालों से घाटे में चल रही ये ई-कॉमर्स कंपनियां लगातार बंपर छूट दे रही है. सवाल उठता है कि घाटे में चल रही कोई कंपनी कैसे इतना छूट दे सकती है. यह जांच का विषय है. इसलिए हमने *भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में मस्जिद बंदर में ऑनलाइन कंपनियों रूपी रावण का पुतला दहन करने का कार्यक्रम शाम 4:30 बजे आयोजित किया है और इसमें व्यापारियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में उपस्थित रहने की अपील की है* ।
अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय महामंत्री एवं केट के महानगर महामंत्री श्री तरुण जैन ने कहा ई-कॉमर्स कंपनियां बिजनेस टू कंज्यमूर डील करने लगी है
लेकिन उनका दावा है कि अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियां सिर्फ बिजनेस टू बिजनेस डील करने के लिए अधिकृत है जबकि जांच एजेंसियों के आंखों मे धूल झोककर ये कंपनियां भारत में बिजनेस टू कंज्यूमर डील करने लगी है. हैरानी ये है कि सरकार ने इनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठा रही है. केंद्रीय मंत्रियों को लिखे चिट्ठी में जिक्र किया गया है कि देश के व्यापारी ई-कॉमर्स कंपनियों के खिलाफ नहीं है और ना ही किसी स्वस्थ्य प्रतिस्पर्धा करने से डरती है लेकिन सभी को एक समान प्लेइंग फील्ड मिलना चाहिए. और महानगर क्षेत्र के व्यापारियों को ज्यादा से ज्यादा संख्या में इस विरोध प्रदर्शन में जुड़ना चाहिए जिससे हमारी संगठन शक्ति और भी मजबूत होगी और इन ऑनलाइन रावण को भारत से भगाने में हमें मदद मिलेगी।

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