विज्ञापनों की भेंट चढ़ रहे है बृक्ष,पर्यावरण प्रेमी परेशान

उदयभान पांडेय।

ठाणे।स्वस्थ्य जीवन के लिए स्वच्छ पर्यावरण की आवश्यकता होती है। पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए प्रतिवर्ष पूरे देश मे बृक्षारोपण का अभियान चलाया जाता है। सड़क के किनारे या सार्वजनिक जगहों पर मौजूद बृक्षों में लोहे का खीला(कांटी) ठोंक कर बैनर एवं पोस्टरों के माध्यम से अपने ब्यवसाय का मुफ्त में विज्ञापन करने का सिलसिला शुरू हो गया है। पेड़ो में खीला ठोंकने की वजह से बृक्ष कमजोर हो रहे है। परेशान पर्यावरण प्रेमी अब ऐसे लोगो के बिरुद्ध करवाई की मांग करने लगे है।
उल्लेखनीय है कि मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर बृक्षारोपण का अभियान चलाया जाता है। लाखो की संख्या में पेड़ पौधे लगाने के दावे किए जाते है। शासन, प्रशासन,वन बिभाग से लेकर सामाजिक संस्थाएं तथा पर्यावरण प्रेमी इस अभियान में बढ़ चढ़कर भाग लेते है। इस अभियान में करोड़ो रूपये खर्च होते है। प्रतिवर्ष इसी तरह के अभियान ठाणे मनपा द्वारा भी चलाया जाता है। सड़को के किनारे तथा खाली जगहों पर बृक्षारोपण किया जाता है।

बृक्षों को सुरक्षित रखने के बजाय उन्हें नुकसान पहुँचाने के कई मामले प्रकाश में आ चुके है। सड़क या सार्वजनिक जगहों पर मौजूद बृक्षों में खीला ठोंक कर विज्ञान लगाने के मामले लगातार बढ़ रहे है। पर्यावरण प्रेमी प्रशांत सिनकर का कहना है कि बृक्षों में विज्ञापन लगाने का काम हर शहरों तथा गाँवों में किया जा रहा है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं के माध्यम से बृक्षों में लगे विज्ञापनों को निकालने का काम लगातर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि मानव शरीर मे जिस तरह से रक्त का संचार होता है उसी तरह से पेड़ पौधौं में भी पानी का संचार होता है। खीला धंसे होने की वजह से पानी का संचार उस हिस्से से नही हो पाता है,

परिणाम स्वरूप वह बृक्ष धीरे धीरे कमजोर एवं संक्रमित होने लगता है। उस हिस्से की टहनियां तेज हवाओं में टूटकर गिर जाती है। उन्होंने बताया कि बृक्षों में धंसे खीले को बाहर निकालने के बाद उस जगह से काला पानी निकलने लगता है। उन्होंने बृक्षों में खीला न ठोकने की लोगो से अपील की है।

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