नवरात्रि के उल्हास नदी से निकाले पूजन सामग्रियों के अंबार, नदी बचाओ कृति समिति की पहल

  • वरिष्ठ संवाददाता।

उल्हासनगर। उल्हासनगर के समीप से बहने वाली उल्हास नदी में नवरात्र देवी, छठ माता,श्रीगणेश उत्सव के दौरान भक्तों द्वारा बड़ी मात्रा में भक्त मना करने के बावजूद पूजन सामग्री(चुनरी,फूल माला,आदि) को मूर्ति के साथ नदी  विर्जन कर देते हैं।जिसके चलते जो नदी लाखो लोगो को पीने का पानी देती हैं वह दूषित हो जाती हैं। हर वर्ष की तरह से इस वर्ष भी  उल्हास नदी बचाओ कृति समिति के सदस्यों की पहल पर 1500 किलो  के करीब पूजन सामग्री पांचवा मैल व रायता फूल , सीमा हॉलिडे जैसी जगह के घाट से बाहर निकाला गया है।

समिति के अध्यक्ष रविन्द्र लिंगायत ने बताया कि पूजन सामग्री को नदी में न विसर्जित करने पर विनती की जाती हैं।पूजन सामग्री के लिए नदी के बाहर अलग  व्यवस्था की जाती हैं।पर भक्तगण नदी की शुद्धता से अधिक आस्था में विश्वास रखते हुए नदी में मूर्ति, घट के साथ  पूजन सामग्री को भी विसर्जित कर देते है।समिति के सदस्य उस पूजन सामग्री को बहते पानी में तैर कर किनारे से  निकालते हैं। उस पूजन सामग्री जैसे मालाफूल, होम की राख से खाद बना कर पेड़ो की जड़ो को दिया जाता हैं। जिससे पेड़ विकसित होते है।इस वर्ष नवरात्र पर्व पर विसर्जन के समय विवेक गंम्भीरराव, निकेत विवारे, अश्विन भोईर,संजय फुन्दे स्थानीय  ग्रामीण,  के अलावा बजरंग राजपूत व आरोटे  ( पुलिस उपनिरीक्षक टिटवाला  पुलिस स्टेशन) की उपस्थिति में बिना किसी हादसे के सुरक्षित ढंग से माता का विसर्जन किया गया।

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